क्या आप कभी ऐसी स्थिति में फंसे हैं जहाँ एक ही समय में दो जानलेवा समस्याओं से लड़ना पड़े? सोचिए, एक तरफ एक दुर्लभ बीमारी आपके खून को खराब कर रही हो। दूसरी तरफ, उसका इलाज आपकी किडनी को तबाह कर देगा। यह किसी थ्रिलर फिल्म का प्लॉट नहीं, बल्कि एक सच्ची कहानी है। यह कहानी है एक भाई के साहस और डॉक्टरों की एक जानलेवा रणनीति की, जिसने मौत को मात दी। यही है एक किडनी का दांव: दुर्लभ बीमारी को हराने की जानलेवा रणनीति

इसमें एक जेनेटिक रक्त विकार था, जिसका नाम है ‘एटिपिकल हीमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम’ (aHUS)। यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि दस लाख में से सिर्फ 1-2 लोगों को होती है। शरीर की अपनी ही इम्यून सिस्टम खून की नलियों पर हमला करने लगती है। नतीजा? किडनी फेल होने लगती है। और यहीं आता है सबसे बड़ा पेंच।

इस बीमारी का एकमात्र इलाज है ‘एकुलिजुमैब’ नामक दवा। लेकिन यहाँ एक विडंबना है। यह दवा बीमारी को रोकती है, लेकिन यह भी किडनी को नुकसान पहुँचा सकती है। तो समस्या ये थी – दवा लो, तो किडनी खराब। दवा न लो, तो बीमारी जान ले ले। एक ऐसा चक्रव्यूह जिससे निकलना नामुमकिन सा लग रहा था।

भाई का बलिदान: एक किडनी, दो जिंदगियाँ

मरीज का भाई इस पूरे सफर का असली हीरो था। जब उसे पता चला कि उसके भाई की किडनी बचाने के लिए एक नई किडनी की जरूरत है, उसने एक पल की भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई। किडनी दान करने का फैसला लिया। लेकिन यहाँ भी चुनौती थी। सामान्य किडनी प्रत्यारोपण में, शरीर नई किडनी को ‘अपना’ मान ले, इसके लिए इम्यून सिस्टम को दबाने वाली दवाएं दी जाती हैं। पर हमारे मामले में, ये दवाएं उस दुर्लभ बीमारी को वापस ला सकती थीं। तो क्या करें?

डॉक्टरों की टीम ने एक ऐसा प्लान बनाया, जो सचमुच में जोखिम भरा था। उन्होंने दो बड़े ऑपरेशनों को एक साथ जोड़ दिया। पहला, भाई से किडनी दान लेना। और दूसरा, मरीज की अपनी खराब किडनी को निकालना। है न हैरान करने वाली बात? आमतौर पर खराब किडनी शरीर में ही रहने दी जाती है। लेकिन यहाँ उसे निकालना जरूरी था, ताकि बीमारी वापस न आए। यह एक साथ दो मोर्चों पर लड़ाई थी।

दोहरी रणनीति: किडनी ट्रांसप्लांट और बोन मैरो ट्रांसप्लांट का कॉम्बो

लेकिन सिर्फ किडनी बदलने से काम नहीं चलने वाला था। क्योंकि बीमारी की जड़ तो उसके अपने जेनेटिक रक्त विकार में थी। तो डॉक्टरों ने एक और जबरदस्त कदम उठाया। उन्होंने अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण (Bone Marrow Transplant) का विकल्प चुना। सोचिए, यह कितना कॉम्प्लेक्स प्लान था!

ये रही पूरी गेम प्लान:

  • स्टेप 1: पहले भाई से हेल्दी बोन मैरो लिया गया। इसे मरीज में ट्रांसप्लांट किया गया। इसका मकसद था उसकी खराब इम्यून सिस्टम को ‘रिसेट’ करना।
  • स्टेप 2: फिर, भाई की एक किडनी मरीज में ट्रांसप्लांट की गई।
  • स्टेप 3: और सबसे महत्वपूर्ण, मरीज की अपनी दोनों खराब किडनियां निकाल दी गईं।

यह पूरी प्रक्रिया एक सटीक सैन्य अभियान की तरह थी। हर कदम पर गहन निगरानी की जरूरत थी। एक रिसर्च के मुताबिक, aHUS जैसे