क्या आपने कभी सोचा है कि ‘सामान्य’ शब्द कितना खतरनाक हो सकता है? खासकर जब बात महिला स्वास्थ्य की हो। असल में, यह एक ऐसा जाल है जिसमें लाखों महिलाएं फंस जाती हैं। वो सोचती हैं कि उनका दर्द बस “सामान्य” है, लेकिन असलियत कुछ और ही होती है। आज हम बात करेंगे एंडोमेट्रियोसिस की, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। और हाँ, इसके पीछे एक बहुत गहरा और चुपचाप चलने वाला पुरुषवाद छिपा है।
यकीन मानिए, जिसे ‘सामान्य’ कहा गया, वह एंडोमेट्रियोसिस का छिपा हुआ पुरुषवाद था। हमने इसे सिर्फ “पीरियड्स का दर्द” बोलकर टाल दिया। लेकिन क्या यह सही है? बिल्कुल नहीं। यह समय है कि हम इस गलतफहमी को तोड़े।
चलिए, एक छोटी सी कहानी से शुरू करते हैं। मेरी एक क्लाइंट, प्रिया (काल्पनिक नाम), 8 साल से डॉक्टरों के चक्कर लगा रही थी। उसका दर्द इतना था कि वो बिस्तर से उठ नहीं पाती थी। लेकिन हर डॉक्टर ने उसे यही कहा, “ये सब नॉर्मल है, तुम ओवर-रिएक्ट कर रही हो।” वो सुनती रही। 8 साल! अंत में जब सही डायग्नोसिस हुआ, तो पता चला उसे एंडोमेट्रियोसिस है। यह सिर्फ उसकी कहानी नहीं, बल्कि करोड़ों महिलाओं की कहानी है, जिन्हें “सामान्य” कहकर खारिज कर दिया गया।

देखिए, एक रिसर्च के मुताबिक, एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित 60% से ज्यादा महिलाओं को पहले “सामान्य” या “मानसिक समस्या” का लेबल लगा दिया जाता है। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है, है ना? (Source: Endometriosis Foundation of America).
अब सवाल उठता है, यह मिसोगिनी कहां से आई? असल में यह एक गहरी सोच है जो समाज में बसी हुई है। जब कोई महिला दर्द की शिकायत करती है, तो अक्सर उसे “कमजोर” या “ड्रामा क्वीन” कहा जाता है। लेकिन अगर कोई पुरुष उतना ही दर्द बताए, तो उसे तुरंत इलाज मिलता है। यही छिपा हुआ पुरुषवाद है। यह आपकी जेब में छिपा हुआ चाकू नहीं है, बल्कि एक सिस्टम है जो हर रोज़ महिलाओं को चोट पहुँचाता है।
तो चलिए, इस गहरे सवाल पर थोड़ा और ध्यान देते हैं।

यह “सामान्य” आखिर क्यों कहा जाता है? 🤔
यह सवाल बहुत ज़रूरी है। सोचिए, जब एक लड़की को पहली बार पीरियड्स होते हैं, तो उसे सिखाया जाता है कि “दर्द होना तो नॉर्मल है, चुप रहो।” यहीं से गलती शुरू होती है। दरअसल, एंडोमेट्रियोसिस का दर्द कभी “सामान्य” नहीं होता। यह एक गंभीर बीमारी है जिसमें गर्भाशय के अंदर की परत शरीर के बाकी हिस्सों में बढ़ जाती है।
- मिथक: “यह सिर्फ पीरियड्स का दर्द है।”
- सच: यह एक ऑटोइम्यून बीमारी हो सकती है जो फर्टिलिटी को प्रभावित करती है।
- उदाहरण: कल्पना कीजिए, आपके पेट के अंदर कोई हर रोज़ दर्द पैदा कर रहा हो, लेकिन लोग कहें “यह तो आम बात है।” कितनी बेबसी होगी, है ना?
डॉक्टरों की भूमिका और पुरुषवाद 🩺
मैं खुद हैरान हूं कि कैसे मेडिकल सिस्टम में भी यह पुरुषवाद घुसा हुआ है। एक स्टडी के मुताबिक, महिलाओं को दिल के दौरे के लक्षण बताने पर भी कम गंभीरता से लिया जाता है। यही हाल महिला स्वास्थ्य की है। एक डॉक्ट

