कल्पना कीजिए, आपके बाथरूम कैबिनेट में रखी एक आम गोली। वही जो हर सिरदर्द, बुखार में काम आती है। क्या वह आपके बच्चे के Autism का कारण बन सकती है? सुनने में अटपटा लगता है, है ना? पर कुछ रिसर्च यही दावा कर रही हैं। एक साधारण दर्द की दवा और Autism का कनेक्शन: 90% लोग क्यों नहीं मानते? यह सवाल सिर्फ विज्ञान का नहीं, हमारी सोच का भी है। आखिर क्यों पेरासिटामोल जैसी हर घर की दवा को Autism का कारण मानने में लोग हिचकिचाते हैं?

हो सकता है आप भी उन 90% में हों। जिन्हें लगता है, “अरे, यह तो बहुत ही सामान्य दवा है!” मैं भी पहले ऐसा ही सोचती थी। फिर मैंने एक रिसर्च पेपर पढ़ा। उसमें दावा किया गया था कि गर्भावस्था के दौरान ली गई पेरासिटामोल, भ्रूण के दिमागी विकास को प्रभावित कर सकती है। मेरा दिमाग चकरा गया। क्या सच में ऐसा हो सकता है?

सच तो यह है कि हम सभी को सरल जवाब पसंद हैं। एक स्पष्ट दुश्मन चाहिए। पर बच्चे का विकास और Autism जैसी जटिल स्थितियों के कारण भी उतने ही जटिल होते हैं। एक ही चीज़ को जिम्मेदार ठहरा देना आसान लगता है। पर क्या यह सच्चाई से भागना तो नहीं?

वह रिसर्च जिसने तूफान खड़ा कर दिया

साल 2008 में एक स्टडी सामने आई। उसमें पेरासिटामोल और बच्चों में ADHD के लक्षणों के बीच संबंध दिखाया गया। फिर 2014 में, एक और बड़ी स्टडी आई। इसने गर्भावस्था में इस दवा के इस्तेमाल और Autism Spectrum Disorder (ASD) के जोखिम को जोड़ा।

पर यहाँ दिक्कत क्या थी? रिसर्च “कोरिलेशन” दिखा रही थी, “कॉजेशन” नहीं। मतलब, दोनों चीज़ें साथ-साथ घटित हो रही थीं, पर यह साबित नहीं कर रही थीं कि एक, दूसरे की वजह है। जैसे, बारिश और छाता। दोनों साथ दिखते हैं, पर बारिश छाते की वजह से तो नहीं होती!

लोग इनकार क्यों करते हैं? साइकोलॉजी की भूमिका

यहाँ आता है दिलचस्प हिस्सा। हमारा दिमाग दो कारणों से इस लिंक को झट से नकार देता है:

  • कॉग्निटिव डिसोनेंस: हम सालों से इस दवा को सुरक्षित मानते आए हैं। अब अगर कोई कहे यह नुकसानदायक है, तो हमारी मानसिक शांति भंग होती है। इसे स्वीकार करना मुश्किल हो जाता है।
  • नॉस्टेल्जिया बायस: “हमारे बुजुर्गों ने भी तो यही दवा ली थी, और सब ठीक था!” यह सोच हमें नए सबूतों को अनदेखा करने पर मजबूर कर देती है।
  • डर: इस कनेक्शन को मान लेने का मतलब है, अपने पिछले फैसलों पर सवाल उठाना। क्या मैंने अनजाने में कुछ गलत किया? यह सवाल बहुत डरावना हो सकता है।

एक स्टैटिस्टिक आपको हैरान कर देगी। एक सर्वे में पाया गया कि सिर्फ 15% लोग ही इस संभावित लिंक को गंभीरता से लेते हैं। बाकी 85% इसे “अति-चिंता” या “झूठी अफवाह” बता कर खारिज कर देते हैं।

तो क्या सचमुच कोई कनेक्शन है?

इसका जवाब “हो सकता है” है। कई वैज्ञानिक यह मानते हैं कि पेरासिटामोल, अगर लंबे समय तक या हाई डोज़ में ली जाए, तो शरीर में एक महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट (ग्लूटाथियोन) को कम कर सकती है। यह एंटीऑक्सीडेंट भ्रूण के दिमाग को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है। इसकी कमी से बच्चे का विकास प्रभावित हो सकता है।

पर याद रखिए, यह एक पहेली का सिर्फ एक टुकड़ा है। Autism के पीछे जेनेटिक्स, पर्यावरण, और अन्य कारकों का एक जटिल मेल होता है। किस