क्या आप भी दिन भर ऑफिस में ही घूमते रहते हैं, लेकिन जैसे ही दोपहर 3 बजते हैं, ऐसा लगता है जैसे कोई आपकी पलकों पर सीमेंट डालकर सो गया हो? शायद आप इसे साधारण थकान के कारण बताकर टाल देते हैं। लेकिन क्या होगा अगर यह थकान आपकी समझ से कहीं ज्यादा गहरी और खतरनाक समस्या का संकेत हो? मेरा एक दोस्त, राहुल, रोज 10 घंटे काम करता था, लेकिन वो इतना कमजोर महसूस करता था कि सीढ़ियाँ चढ़ना भी उसके लिए मैराथन दौड़ने जैसा बन गया था। उसने सोचा ये सिर्फ लो ब्लड प्रेशर है, लेकिन असली कहानी कुछ और ही थी।
यहाँ असली सवाल यूँ है: क्या आपकी थकान खून की खामोश कमी है? क्योंकि अक्सर ये बीमारी बिना आवाज़ किए अपना काम करती रहती है। आज हम बात करेंगे उन खून की कमी के लक्षण के बारे में जिन्हें हम रोज़ाना इग्नोर कर देते हैं, और उन एनीमिया के छिपे संकेत के बारे में जो आपको हैरान कर देंगे। और हाँ, ये सब मैं अपने अनुभव और लोगों की कहानियों से सीखा हूँ, इसलिए इसे हल्के में न लें।
सबसे पहले एक सच्चाई जान लीजिए। हमारा शरीर एक कार की तरह है और खून उसका पेट्रोल। अगर पेट्रोल टैंक लीक हो रहा है या उसमें गंदगी है, तो कार चलेगी कैसे? बिल्कुल नहीं। यही हाल हमारी बॉडी का है। जब शरीर में हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, तब हर कोशिका को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। नतीजा? वो खून की कमी से थकान। ये कोई बहाना नहीं, बल्कि एक मेडिकल इमरजेंसी है जो धीरे-धीरे आपकी जान ले सकती है।
अब मुश्किल ये है कि लोग इसे पहचानते नहीं हैं। क्योंकि शुरुआती लक्षण बहुत ही मामूली होते हैं। जैसे नाखूनों का सफेद पड़ना, चक्कर आना, या बिना किसी काम के दिल की धड़कन का तेज होना। क्या आपने कभी गौर किया है कि सुबह उठने के 2 घंटे बाद ही आपको ऐसा लगता है जैसे रात भर जंग लड़ी हो? अगर हाँ, तो रुकिए, ये सिर्फ नींद की कमी नहीं है।

मैंने एक बार एक महिला से बात की, जिसका नाम सीमा था। उसे लगता था कि उसे सर्दी-जुकाम हो रहा है, तो वो अलग-अलग दवाइयाँ खा रही थी। लेकिन उसकी दिक्कत और बढ़ती जा रही थी। जब डॉक्टर ने ब्लड टेस्ट किया, तो पता चला उसका हीमोग्लोबिन सिर्फ 7 था, जबकि सामान्य स्तर 12-14 होता है। डॉक्टर ने उसे तुरंत आयरन की दवाइयाँ दीं, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी ये थी कि वो इस एनीमिया जोखिम कारक को पहचान नहीं पाई थी। भारत में हर 10 में से 6 महिलाएं एनीमिया से जूझ रही हैं, और सबसे डरावनी बात ये है कि उनमें से आधी को अपनी बीमारी के बारे में पता ही नहीं होता।
तो चलिए अब समझते हैं कि आखिर कौन है जोखिम में? अगर आप कभी हरी सब्जियों से ज्यादा फास्ट फूड पसंद करते हैं, या महिलाओं में पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होती है, तो आप पहले से ही रेड ज़ोन में हैं। इसके अलावा, शाकाहारी लोगों में आयरन की कमी बहुत आम है। क्योंकि शरीर को आयरन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, और मांस, मछली जैसी चीजों में ये आसानी से मिल जाता है। पर हाँ, इसका मतलब ये नहीं कि साग-सब्जियां बेकार हैं। बस उन्हें विटामिन C के साथ लेने की जरूरत होती है। जैसे पालक खाएं और साथ में संतरे का रस पीएं, तभी असर होगा।
अब सबसे कठिन हिस्सा है: खून की कमी के लक्षण। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि सिर्फ चक्कर आना ही लक्षण है। नहीं दोस्तों, ये बहुत पुरानी सोच है। क्या आप जानते हैं कि बालों का झड़ना, त्वचा का रूखापन और यहाँ तक कि चाय-कॉफी की अत्यधिक क्रेविंग भी एनीमिया के संकेत हो सकते हैं? मुझे याद है, मेरी एक सहेली को कुच्ची चाय पीने की इतनी आदत थी कि वो मिट्टी खाने लगी थी। ये एक अजीब सी बीम

