क्या आपने कभी सोचा है कि जिस पल को हर औरत की ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत पल बताया जाता है, वो किसी के लिए सबसे अकेला पल क्यों बन जाता है? चारों तरफ़ बस यही सुनने को मिलता है कि *माँ बनना* एक फरिश्ता बनने जैसा है, लेकिन कोई आपको ये नहीं बताता कि रात के 3 बजे जब आप अकेले रो रही होती हैं और आपका शरीर दर्द से टूट रहा होता है, तो माँ बनने का अफसोस कैसे दिल में घर कर सकता है।
यकीनन, ये एक विषय है जिसे बात करने में डर लगता है। ये वो गुप्त अफसोस हैं जो हर माँ के मन में कभी न कभी आते हैं, लेकिन दुनिया को दिखते नहीं। हम बात कर रहे हैं मातृत्व में फंसना जैसे उन पलों की, जहाँ प्यार होने के बावजूद, एक औरत का दम घुटने लगता है। आज हम खोलेंगे वो राज जो औरतें बस अपने तक ही रखती हैं।
चलिए, पहले ये समझते हैं कि कैसे समाज ने माँ बनने को एक ‘स्वर्गीय अनुभव’ की तरह पैकेज कर दिया है। जब मैंने पहली बार अपनी सहेली को उसके बच्चे को देखते हुए देखा, तो हर कोई बोल रहा था “कितनी खुश हो तुम!” लेकिन उसकी आँखों के नीचे के काले घेरे और उसकी थकी हुई हँसी कुछ और ही कह रही थी। सच्चाई ये है कि मातृत्व के regrets उतने ही सच्चे हैं जितना कि एक बच्चे की पहली मुस्कान।
रातों की नींद और खोयी हुई पहचान
बच्चा होने के बाद पहले छह महीने… अरे, यार, मैं झूठ नहीं बोलूँगी। ऐसा लगता है जैसे आप एक ज़ोंबी बन गई हों। नींद पूरी नहीं होती, शरीर में पानी नहीं है, और आपका अपना कोई वक़्त नहीं बचता। एक स्टडी के अनुसार, 80% नई माएँ बच्चे के पहले साल में गहरी थकान और माँ की परेशानी को महसूस करती हैं, लेकिन इस बारे में खुलकर बात नहीं होती।
क्या आपको याद है जब आप ऑफिस में एक अच्छा प्रोजेक्ट लीड करती थीं या फिर दोस्तों के साथ रातभर हँसती थीं? वो औरत अब कहाँ है? औरतों की छुपी बातें में से एक बात ये है कि वो अपनी पहचान खोने का अफसोस मनाती हैं। एक क्लाइंट ने बताया था, “मैं बस इतना चाहती हूँ कि मुझे ‘रिया की माँ’ के बजाय सिर्फ ‘रिया’ के नाम से पुकारा जाए।” यही वो पल है जब माँ बनने का एक साइलेंट सा दुख इंसान को घेर लेता है।
सोचिए, कैसे हम अपने करियर और सपनों को साइड करके उस छोटे से इंसान के लिए सब कुछ होने की कोशिश करते हैं। किसी ने आपको बताया था कि माँ बनने का अफसोस का मतलब ये भी हो सकता है कि आप अपने शौक को छोड़ रही हैं?
वो बातें जो दिन में कभी नहीं कही जातीं
जैसे कि, “मैं बीमार हूँ लेकिन मुझे आराम नहीं मिल सकता।” या फिर, “काश मैंने अपने करियर को बीच में न छोड़ा होता।” एक और असहज सच्चाई ये है कि कई महिलाएँ अपने बच्चे के प्रति गुस्सा या नाराज़गी महसूस करती हैं, जो एक बहुत बड़ा taboo है। मैंने एक बार पढ़ा था कि 60% से अधिक माएँ कभी न कभी महसूस करती हैं कि वे एक अच्छी माँ नहीं हैं, और ये भावना मातृत्व में फंसना की ओर ले जाती है।
- बिना पूछे सलाह: “तुम उसे ऐसे क्यों खिला रही हो?” ये सुन-सुन कर औरतें बौखला जाती हैं।
- पार्टनर का सपोर्ट न मिलना: हर काम अकेले करना, जैसे की आप सिंगल मदर हों।
- शरीर में बदलाव: बदन पर खिंचाव के निशान (stretch marks) और कोई आपको ये नहीं बताता कि आपका सेक्सुअल लाइफ खत्म हो जाता है।
सोशल मीडिया का झूठा पर्दा
सबसे बड़ा झूठ त
